सौर ऊर्जा की दुनिया में एक बड़ी खबर आई है। दुनिया के सबसे बड़े सोलर मॉड्यूल निर्माताओं में से एक, चीनी कंपनी JinkoSolar ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी ने National University of Singapore (NUS) और Solar Energy Research Institute of Singapore (SERIS) के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर एक Perovskite-TOPCon Tandem Solar Cell विकसित की है, जिसकी certified power conversion efficiency 32.76% दर्ज की गई है। यह रिजल्ट चीन के National Photovoltaic Industry Metrology Test Center (NPVM) द्वारा प्रमाणित किया गया है। इस उपलब्धि को Nature Energy जर्नल में प्रकाशित किया गया है, जो दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में से एक है।

सोलर सेल की Efficiency इतनी जरूरी क्यों है?
आम सोलर पैनल जो आज हमारे घरों की छतों पर लगे होते हैं, उनकी efficiency आमतौर पर 18% से 22% के बीच होती है। इसका मतलब यह है कि सूरज की जो रोशनी पैनल पर पड़ती है, उसका केवल यही हिस्सा बिजली में बदल पाता है। बाकी ऊर्जा गर्मी के रूप में बर्बाद हो जाती है। ऐसे में जब कोई कंपनी 32% से ज्यादा efficiency हासिल करती है, तो यह पूरे सोलर इंडस्ट्री के लिए एक गेम-चेंजर साबित होता है। ज्यादा efficiency का मतलब है कि कम जगह में ज्यादा बिजली, कम खर्च में ज्यादा ऊर्जा और आम आदमी के लिए सोलर एनर्जी का इस्तेमाल और भी किफायती।
Perovskite और TOPCon, ये दोनों टेक्नोलॉजी क्या हैं?
इस उपलब्धि को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि Perovskite और TOPCon टेक्नोलॉजी क्या होती हैं।
TOPCon (Tunnel Oxide Passivated Contact) एक उन्नत सिलिकॉन सोलर सेल टेक्नोलॉजी है जो आज इंडस्ट्री में मुख्यधारा बन चुकी है। यह पारंपरिक PERC सेल से ज्यादा कुशल होती है और इसे बड़े पैमाने पर फैक्ट्रियों में आसानी से बनाया जा सकता है।
Perovskite एक विशेष प्रकार का क्रिस्टल पदार्थ है जो सूरज की रोशनी को बेहद प्रभावी ढंग से बिजली में बदलने की क्षमता रखता है। अकेले Perovskite सेल बहुत कुशल होती हैं, लेकिन उनकी स्थिरता एक बड़ी चुनौती रही है।
Tandem Cell वह होती है जिसमें Perovskite को ऊपर (Top Cell) और TOPCon को नीचे (Bottom Cell) रखा जाता है। दोनों मिलकर सूरज के प्रकाश के अलग-अलग हिस्सों को बिजली में बदलते हैं, जिससे efficiency कई गुना बढ़ जाती है।
असली समस्या क्या थी और वैज्ञानिकों ने उसे कैसे सुलझाया?
JinkoSolar के रिसर्चर Menglei Xu ने बताया कि इंडस्ट्रियल TOPCon वेफर्स की मोटाई लगभग 130 माइक्रोमीटर होती है और उनकी thermal conductivity बहुत ज्यादा होती है। जब Perovskite परत को ऊपर annealing (गर्म करने) की प्रक्रिया से गुजारा जाता है, तो नीचे का TOPCon वेफर बहुत तेजी से गर्मी सोख लेता है। इसकी वजह से Perovskite की परत बेहद तेजी से और बेकाबू तरीके से crystalize हो जाती है, जिससे उसमें voids (खाली जगहें) और defects (दोष) बन जाते हैं। ये defects सोलर सेल की efficiency को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।
MBT Ligand: वो जादुई तत्व जिसने सब बदल दिया
इस समस्या के समाधान के लिए रिसर्च टीम ने एक नया और अभिनव तरीका अपनाया। पारंपरिक रणनीतियाँ अकार्बनिक लेड आयन्स पर केंद्रित थीं, लेकिन इस टीम ने कार्बनिक घटकों को निशाना बनाया। उन्होंने Perovskite फिल्म बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले precursor solution में 2-Mercaptobenzothiazole (MBT) ligand नामक एक खास पदार्थ मिलाया।
Xu ने समझाया कि MBT ligand की dual-mode binding ability होती है, यानी यह एक साथ दो तरह से काम करता है। इसके heterocyclic N atom और thiol (-SH) group एक साथ hydrogen bonding और electrostatic interaction के जरिए FA cations को स्थिर करते हैं। इससे Perovskite की crystallization प्रक्रिया धीमी और नियंत्रित हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप एक compact, void-free और high-quality Perovskite फिल्म तैयार होती है।
इस सोलर सेल की परतें कैसे बनी हैं?
| परत (Layer) | सामग्री (Material) |
| Substrate | Indium Tin Oxide (ITO) |
| Hole Transport Layer | Nickel Oxide (NiOₓ) + SAM |
| Absorber | Perovskite (MBT-treated) |
| Electron Transport Layer | C60 + Tin Oxide (SnO₂) |
| Top Contact | ITO |
| Bottom Cell | TOPCon Monocrystalline Silicon |
टेस्टिंग में क्या नतीजे आए?
Standard illumination conditions के तहत 0.925 cm² के इस tandem device ने peak efficiency 33.62% हासिल की और open-circuit voltage 1.97 V तक पहुँची, जो कि असाधारण रूप से उच्च है। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि यह सेल लंबे समय तक स्थिर रही। 85% सापेक्षिक आर्द्रता और कमरे के सामान्य तापमान पर 1,700 घंटे की लगातार operation के बाद भी इसने अपनी प्रारंभिक efficiency का 91% बनाए रखा। यह stability का आँकड़ा Perovskite टेक्नोलॉजी के लिए बेहद उत्साहजनक है, क्योंकि Perovskite की स्थिरता हमेशा एक बड़ी चिंता का विषय रही है।
JinkoSolar की efficiency का सफर
यह उपलब्धि अकेली नहीं है। JinkoSolar लगातार इस क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बना रही है। जनवरी 2025 में कंपनी ने 33.84% efficiency हासिल की थी, जो उनके पिछले रिकॉर्ड 33.24% से बेहतर थी। इसके बाद नवंबर 2025 में JinkoSolar ने 34.76% की efficiency का ऐलान किया, जो कंपनी का 32वाँ world record था। इस तरह Nature Energy में प्रकाशित 32.76% की यह certified research उस पूरी scientific journey का एक अहम पड़ाव है जिसने बाद में इससे भी ऊँची efficiency को संभव बनाया।
इंडस्ट्री के लिए क्या हैं मायने?
इस रिसर्च की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ एक लैब प्रयोग नहीं है। रिसर्च टीम ने यह सुनिश्चित किया है कि MBT ligand strategy को सीधे large-area और high-throughput solution processing workflows में लागू किया जा सकता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि मौजूदा TOPCon फैक्ट्रियों को बड़ा बदलाव किए बिना ही इस नई तकनीक को अपनाया जा सकता है। JinkoSolar के CTO Dr. Hao Jin का कहना है कि tandem technology, TOPCon के बाद अगली disruptive दिशा होगी।
भारत जैसे देश के लिए यह खबर और भी अहम है, जहाँ सरकार 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य रख चुकी है। जब सोलर सेल की efficiency इस स्तर तक पहुँचेगी, तो कम जमीन में ज्यादा बिजली उत्पादन संभव होगा और सोलर एनर्जी की लागत और भी कम होगी।
JinkoSolar और इन शोधकर्ताओं का यह काम साबित करता है कि सौर ऊर्जा की सीमाएँ अभी पूरी तरह तय नहीं हुई हैं। विज्ञान हर दिन उन्हें और आगे धकेल रहा है, और वह दिन दूर नहीं जब सोलर पैनल हर घर की छत पर होंगे और बिजली का बिल लगभग शून्य हो जाएगा।