आज के समय में जब पूरी दुनिया क्लीन एनर्जी की तरफ तेजी से बढ़ रही है, सोलर पैनल्स इस बदलाव की सबसे अहम कड़ी बन चुके हैं। भारत हो या यूरोप, हर जगह सोलर एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ रहा है। लेकिन एक सवाल हमेशा से रहा है कि क्या हम सूरज की रोशनी से और ज्यादा बिजली बना सकते हैं? इसी सवाल का जवाब देते हुए चीन की Soochow University और Zhejiang Jinko Solar Co. Ltd. के रिसर्चर्स ने एक ऐसा नया सोलर सेल डिज़ाइन पेश किया है, जिसने 32.73% की certified efficiency हासिल कर ली है। यह खबर Nature Energy जर्नल में प्रकाशित हुई है और पूरी दुनिया के एनर्जी एक्सपर्ट्स इसकी तारीफ कर रहे हैं।

TOPCon क्या होता है और इसमें क्या कमी थी?
TOPCon यानी Tunnel Oxide Passivating Contact एक खास तकनीक है जो सोलर सेल की efficiency बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होती है। इसमें एक बेहद पतली इंसुलेटिंग ऑक्साइड लेयर और उसके ऊपर doped polycrystalline silicon की लेयर होती है। यह तकनीक काफी कारगर मानी जाती है, लेकिन इसमें एक बड़ी दिक्कत थी। जब फ्रंट साइड पर पूरी p-type TOPCon लेयर लगाई जाती थी, तो उसे अच्छे electrical contact के लिए मोटी polysilicon फिल्म चाहिए होती थी। यही मोटी फिल्म सूरज की रोशनी का एक बड़ा हिस्सा खुद सोख लेती थी, जिसे parasitic optical absorption कहते हैं। इससे efficiency गिर जाती थी।
सीधे शब्दों में कहें तो पुराने TOPCon डिज़ाइन में recombination losses कम करो तो optical losses बढ़ जाते थे, और optical losses कम करो तो recombination बढ़ जाती थी। यह एक ऐसा ट्रेडऑफ था जिसे तोड़ना बेहद जरूरी था।
नए डिज़ाइन में क्या है खास?
रिसर्च टीम ने इस ट्रेडऑफ को तोड़ने के लिए एक पूरी तरह नई सोच अपनाई। उन्होंने सोलर सेल के फ्रंट और रियर दोनों साइड्स को नए सिरे से डिज़ाइन किया।
फ्रंट साइड का नया तरीका
फ्रंट साइड पर पूरी जगह TOPCon लगाने की बजाय उन्होंने एक “finger-type” patterned n-type TOPCon contact बनाया। इसमें silicon oxide और phosphorus-doped polycrystalline silicon की लेयर सिर्फ मेटल फिंगर्स के नीचे रखी गई। इससे parasitic absorption काफी हद तक कम हो गया और carrier selectivity भी बेहतरीन बनी रही। साथ ही silicon लेयर की सतह को smoother बनाने के लिए rounded pyramid textures का इस्तेमाल किया गया और एक खास Gradient Thermal Field (GTF) deposition process से polysilicon लेयर को ज्यादा uniform और crystalline बनाया गया।
रियर साइड का बिल्कुल अलग अप्रोच
रियर साइड पर एक bilayer p-type TOPCon structure बनाई गई जिसमें बीच में एक ultrathin interfacial SiOx लेयर थी। इस डिज़ाइन ने passivation को सुधारा, boron की वजह से होने वाले नुकसान को रोका और firing के दौरान silver के अंदर घुसने से भी बचाया।
Perovskite के साथ मिलकर बना Tandem Solar Cell
अकेले नए TOPCon सेल ने 26.34% की certified efficiency हासिल की, जो कि industrial size पर एक बेहतरीन नतीजा है। लेकिन असली कमाल तब हुआ जब इसे Perovskite के साथ जोड़ा गया। Perovskite एक खास क्रिस्टल स्ट्रक्चर वाला मटेरियल है जो रोशनी को बेहद कुशलता से absorb करता है। Tandem solar cell में दो या उससे ज्यादा अलग-अलग bandgap वाली लेयर्स एक के ऊपर एक रखी जाती हैं ताकि सूरज की रोशनी का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा बिजली में बदला जा सके। Perovskite और TOPCon के इस मेल ने 32.73% की certified efficiency दर्ज की, जो मौजूदा सिलिकॉन-आधारित सोलर सेल्स की तुलना में काफी बेहतर है।
तुलनात्मक जानकारी एक नजर में
| सोलर सेल का प्रकार | औसत Efficiency | खासियत |
| पारंपरिक Silicon Solar Cell | 20 से 22% | सस्ता और टिकाऊ |
| मौजूदा TOPCon Solar Cell | 24 से 25% | कम recombination losses |
| नया TOPCon डिज़ाइन (अकेला) | 26.34% | बेहतर passivation और कम optical loss |
| Perovskite/TOPCon Tandem | 32.73% | अब तक की बेहतरीन efficiency |
भारत और दुनिया के लिए क्या मायने रखता है यह?
भारत सरकार ने 2030 तक 500 GW renewable energy का लक्ष्य रखा है, जिसमें सोलर एनर्जी की बड़ी भूमिका है। ऐसे में अगर यह तकनीक commercial level पर उपलब्ध हो जाए, तो कम जगह में ज्यादा बिजली बनाना संभव होगा। घरों की छतों पर लगे पैनल्स से पहले से कहीं ज्यादा बिजली मिल सकेगी और बड़े सोलर फार्म्स की लागत भी घटेगी।
आगे की राह
रिसर्च टीम अभी इस डिज़ाइन को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है। उनकी योजना है कि poly-Si फिंगर्स की चौड़ाई और मोटाई को और कम किया जाए ताकि optical losses और भी घटें। साथ ही tandem devices की long-term stability को बेहतर बनाना भी प्राथमिकता में है। यह रिसर्च साबित करती है कि सोलर एनर्जी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि सबसे रोमांचक अध्याय अभी शुरू हो रहा है।