रत बन चुकी है, लेकिन बिजली का बिल देखकर पसीने छूट जाते हैं। ऐसे में बहुत से लोग सोलर सिस्टम लगवाने के बारे में सोचते हैं। सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल यह होता है कि क्या 3kW के सोलर सिस्टम पर 2 एसी चल सकते हैं? इस आर्टिकल में हम इसी सवाल का पूरा और सीधा जवाब देंगे, साथ ही बिजली खर्च का पूरा हिसाब भी समझाएंगे।

3kW सोलर सिस्टम प्रतिदिन कितनी बिजली बनाएगा?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि 3kW का सोलर सिस्टम एक दिन में कितनी यूनिट बिजली तैयार करता है। भारत में औसतन 5 से 6 घंटे की अच्छी धूप मिलती है। इस हिसाब से 3kW का सिस्टम प्रतिदिन लगभग 12 से 15 यूनिट बिजली उत्पन्न कर सकता है। राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में जहां धूप ज्यादा रहती है, वहां यह संख्या 15 यूनिट तक भी पहुंच सकती है।
यह बिजली उत्पादन मौसम, पैनल की दिशा, धूल और छाया जैसी चीजों पर निर्भर करता है। इसलिए औसत रूप से 12 यूनिट प्रतिदिन मानकर चलना सही रहता है।
1 टन और 1.5 टन एसी कितनी बिजली खाता है?
एसी की बिजली खपत उसकी स्टार रेटिंग और टनेज पर निर्भर करती है। आमतौर पर एक सामान्य 1.5 टन का एसी प्रति घंटे लगभग 1.2 से 1.5 यूनिट बिजली खर्च करता है। यदि वह 5 स्टार रेटेड इन्वर्टर एसी है, तो यह खपत थोड़ी कम होकर 1.0 से 1.2 यूनिट प्रति घंटे हो जाती है।
1 टन का एसी आमतौर पर 0.8 से 1.0 यूनिट प्रति घंटे बिजली खाता है। इसलिए अगर आप 1 टन के दो एसी एक साथ चलाते हैं, तो कुल मिलाकर लगभग 1.6 से 2.0 यूनिट प्रति घंटे की खपत होगी।
क्या 3kW पर 2 एसी चल सकते हैं?
यह सवाल थोड़ा पेचीदा है, लेकिन इसका जवाब एसी की क्षमता पर निर्भर करता है।
3kW सोलर सिस्टम पर एसी लोड की स्थिति:
| एसी का प्रकार | संख्या | अनुमानित लोड | क्या चलेगा? |
| 1.5 टन एसी | 1 | 1.5 kW | हां, आराम से |
| 1 टन एसी | 2 | 2.0 kW | हां, आराम से |
| 1.5 टन एसी | 2 | 3.0 kW+ | नहीं, ओवरलोड होगा |
3kW सोलर सिस्टम पर एक 1.5 टन का एसी आराम से चलता है और साथ में घर के दूसरे उपकरण जैसे पंखे, लाइट, फ्रिज और टीवी भी चल सकते हैं। अगर आप 2 एसी चलाना चाहते हैं, तो 1 टन के 2 एसी आसानी से चल जाएंगे। लेकिन 1.5 टन के 2 एसी एक साथ चलाना 3kW सिस्टम पर संभव नहीं है, क्योंकि उनका कुल लोड ही 3kW से ज्यादा हो जाता है और इससे इन्वर्टर या सिस्टम ओवरलोड हो सकता है।
On-Grid, Off-Grid और Hybrid में से कौन सा सिस्टम एसी के लिए सही है?
On-Grid सोलर सिस्टम
ऑन-ग्रिड सिस्टम सीधे बिजली के ग्रिड से जुड़ा होता है। इसमें बैटरी नहीं होती। दिन में सोलर से बिजली मिलती है और रात को या बादल वाले दिन ग्रिड की बिजली काम आती है। एसी चलाने के लिए यह सिस्टम अच्छा है बशर्ते आपके क्षेत्र में बिजली कटौती कम हो।
Off-Grid सोलर सिस्टम
ऑफ-ग्रिड सिस्टम पूरी तरह बैटरी पर निर्भर करता है। इसमें ग्रिड से कोई संपर्क नहीं होता। एसी जैसे भारी लोड को इसमें चलाना थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि इसके लिए बड़ी और महंगी बैटरी की जरूरत होती है। छोटे क्षेत्रों या जहां ग्रिड बिल्कुल नहीं है, वहां यह उपयोगी है।
Hybrid सोलर सिस्टम
हाइब्रिड सिस्टम सबसे बेहतर विकल्प है। यह सोलर, बैटरी और ग्रिड तीनों का मिश्रण होता है। दिन में सोलर से बिजली बनती है, अतिरिक्त बिजली बैटरी में जमा होती है और जरूरत पड़ने पर ग्रिड भी मदद करता है। एसी चलाने के लिए हाइब्रिड सिस्टम सबसे विश्वसनीय रहता है।
प्रतिदिन 1.5 टन एसी पर कितने रुपये खर्च होते हैं?
अगर आप 1.5 टन का एसी रोज 8 घंटे चलाते हैं और प्रति घंटे 1.2 यूनिट बिजली की खपत मानें, तो एक दिन में लगभग 9.6 यूनिट बिजली खर्च होती है। भारत में बिजली की औसत दर 7 से 8 रुपये प्रति यूनिट मानें तो एक दिन का खर्च लगभग 67 से 77 रुपये बनता है। महीने का यह खर्च करीब 2000 से 2300 रुपये हो जाता है, और यह सिर्फ एक एसी का हिसाब है।
सोलर सिस्टम लगाने के बाद यह खर्च काफी हद तक कम हो जाता है क्योंकि दिन में जब एसी सबसे ज्यादा चलती है, उसी वक्त सोलर पैनल सबसे ज्यादा बिजली बनाते हैं।
निष्कर्ष
3kW सोलर सिस्टम पर 1.5 टन का एक एसी और घर के अन्य उपकरण आराम से चल सकते हैं। अगर आप दो एसी चलाना चाहते हैं तो 1 टन के दो एसी का विकल्प सही रहेगा। 1.5 टन के दो एसी एक साथ चलाने के लिए आपको कम से कम 5kW या उससे बड़े सोलर सिस्टम की जरूरत होगी। एसी के साथ सोलर का सबसे स्मार्ट विकल्प हाइब्रिड सिस्टम है जो हर मौसम और हर परिस्थिति में काम करता है। सही प्लानिंग के साथ सोलर सिस्टम लगाने से बिजली बिल में भारी बचत होती है और गर्मियों में भी बिना चिंता के एसी का आनंद लिया जा सकता है।