आज के समय में सोलर एनर्जी तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से यही रही है कि कम जगह में ज्यादा बिजली कैसे बनाई जाए। इसी दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है EPFL और CSEM के वैज्ञानिकों ने, जिन्होंने एक नई ट्रिपल-जंक्शन सोलर सेल तैयार की है जिसकी एफिशिएंसी 30.02% तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि पहले के 27.1% रिकॉर्ड को पार कर चुकी है और अब इसे सोलर इंडस्ट्री में एक गेम चेंजर माना जा रहा है।

आमतौर पर इतनी ज्यादा एफिशिएंसी वाली सोलर टेक्नोलॉजी बहुत महंगी होती है और केवल स्पेस मिशन में ही इस्तेमाल होती है, लेकिन इस नई तकनीक की खास बात यह है कि इसे जमीन पर भी इस्तेमाल करने लायक बनाया जा सकता है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि अब कम पैनल लगाकर ज्यादा बिजली बनाई जा सकेगी, जिससे लागत भी घटेगी और जगह की बचत भी होगी।
ट्रिपल-जंक्शन सेल कैसे काम करती है
यह नई सोलर सेल पारंपरिक सोलर पैनल से काफी अलग है क्योंकि इसमें तीन लेयर यानी तीन जंक्शन का इस्तेमाल किया गया है। इसमें नीचे सिलिकॉन की लेयर होती है, जबकि ऊपर की दो लेयर पेरोव्स्काइट (Perovskite) नाम के खास मटेरियल से बनाई जाती हैं। यह डिजाइन अलग-अलग वेवलेंथ की सूर्य की रोशनी को बेहतर तरीके से कैप्चर करता है, जिससे ज्यादा एनर्जी जनरेट होती है। वैज्ञानिकों ने इसमें कई नई तकनीकों का इस्तेमाल किया है, जैसे एक खास मॉलिक्यूल का उपयोग जो पेरोव्स्काइट क्रिस्टल की क्वालिटी को बेहतर बनाता है और टॉप सेल का वोल्टेज 1.4 वोल्ट तक बढ़ा देता है।
इसके अलावा मिडिल लेयर में तीन-स्टेप फैब्रिकेशन प्रोसेस अपनाया गया है जिससे इन्फ्रारेड लाइट का बेहतर उपयोग होता है। इतना ही नहीं, लेयर्स के बीच नैनोपार्टिकल्स भी जोड़े गए हैं, जो लाइट को वापस रिफ्लेक्ट करके करंट बढ़ाने में मदद करते हैं। इन सभी सुधारों का नतीजा यह है कि यह सोलर सेल ज्यादा एफिशिएंट होने के साथ-साथ भविष्य में बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए भी उपयुक्त बन सकती है।
भविष्य में क्या होगा फायदा और चुनौतियां
इस नई खोज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब सोलर सिस्टम की लागत कम हो सकती है, क्योंकि ज्यादा बिजली बनाने के लिए कम पैनल की जरूरत होगी। इससे घरों की छत पर सोलर सिस्टम लगाना और भी आसान हो जाएगा और बड़े सोलर प्लांट्स में भी जमीन की बचत होगी। आज के समय में हाई एफिशिएंसी सोलर सेल्स जैसे III-V टेक्नोलॉजी बहुत महंगी होती हैं, लेकिन यह नई तकनीक सिलिकॉन और पेरोव्स्काइट जैसे सस्ते मटेरियल पर आधारित है, जिससे यह ज्यादा किफायती साबित हो सकती है।
हालांकि अभी भी कुछ चुनौतियां बाकी हैं, जैसे इन सोलर सेल्स की लाइफ और बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन। वैज्ञानिक अब इन्हीं पहलुओं पर काम कर रहे हैं ताकि इस टेक्नोलॉजी को जल्द ही बाजार में उतारा जा सके। अगर यह सफल होता है, तो आने वाले समय में हम ऐसे सोलर पैनल देख सकते हैं जो कम जगह में ज्यादा बिजली देंगे और बिजली के बिल को काफी हद तक कम कर देंगे।
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